Let's learn and explore the knowledge in a creative way
മഴത്തുളളി
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മൃദുസ്പർശമായ് പൊഴിയുന്ന
ഈ മഴത്തുള്ളികൾക്ക് പറയാനുണ്ട്
കഥയും കവിതയും
അതിലേറെ നൊമ്പരവും
ഒരു നിമിഷം
ഞാനോർത്തുപോയ്
ഈ തേങ്ങലുകൾ കോറിയിടാൻ
എന്റെ തൂലിക
പോരല്ലോ എന്ന്.
भाषाई कौशल भाषाई कौशल से तात्पर्य है, भाषा ठीक तरह से इस्तमाल करने की योग्यता हासिल करना । भाषाई कौशल में सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना - ये चार कौशल आते हैं । इन चारों कौशलों का समान रूप से विकसित होना भाषा शिक्षण में ज़रूरी माना जाता है। बच्चों में इन कौशलों का विकास करवाना ही एक शिक्षक का प्रथम लक्ष्य होना चाहिए। भाषाई कौशलों को सीखने का मनोवैज्ञानिक क्रम - सुनना > बोलना > पढ़ना > लिखना भाषाई कौशलों का वर्गीकरण (1) इनका वर्गीकरण दो प्रकार से होता हैं । 1. ग्रहणात्मक ( गृह्मयात्मक ) कौशल 2. अभिव्यक्तात्मक कौशल सुनना और पढ़ना ग्रहणात्मक कौशल के अंतर्गत आते हैं । इनके ज़रिए भाव और विचार ग्रहण किया जाता हैं । बोलना और लिखना अभिव्यक्तात्मक कौशल में आते हैं । इनका प्रयोग अपने विचारों भावों आदि की अभिव्यक्ति केलिए किया जाता हैं । भाषाई कौशलों का वर्गीकरण (2) भाषाई कौशलों को एक और तरीके से भी विभाजित किया गया है । 1. प्रधान कौशल 2. गौण कौशल 1. प्रधान कौशल भाषा का सर्वप्रथम कार्य विचार विनिमय करना ...
दुःख - कहानी ( यशपाल ) पात्र : दिलीप ,हेमा ,लड़का, लड़के की माँ कहानी का नायक दिलीप है । हेमा उसकी पत्नी है । एक छोटी सी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है । दिलीप ने अपनी पत्नी को दांपत्य जीवन में पूर्ण स्वतंत्रता दी थी । दिलीप भी वही स्वतंत्रता चाहता है अपनी पत्नी से । हेमा दिलीप के उसकी सहेली के साथ सिनेमा देख आने के कारण दिनभर रूठी रहकर दूसरे ही दिन माँ के घर चली गई । दिलीप का मन एकदम दुःखी हो जाता है । इस दुःखी मन को हल्का करने के लिए वह बाहर टहलने केलिए चला जाता है । शाम का वक्त था । बारिश भी थ। वह पार्क में एक बेंच में बैठ जाता है । वह सोचता है कि, यदि ठंड लग जाने से वह बीमार हो जाए, उसकी हालत खराब हो जाए, तो वह चुपचाप शहीद की तरह अपने दुःख को अकेला ही सहेगा । एक दिन मृत्यु दबे पाँव आएगी और उसके रोग के कारण, उसके सिर पर सांत्वना का हाथ फेर उसे शांत कर चली जाएगी । उस दिन उसे होकर हेमा अपने नुकसान का अंदाज़ा कर अपने व्यवहार के लिए पछताएगी । ऐसे विचार दिलीप के मन में आते है । कुछ देर बाद जब वह घर की ओर चलता है तब उसका ध्यान एक छोटा सा बालक पर पड़ता है ।...
Youtube भाषार्जन प्रक्रिया भाषा अर्जन ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत हम अपने आस पास के वातावरण, माता पिता और अन्य व्यक्तियों के सम्पर्क में रहकर भाषा सीखते है। प्राकृतिक प्रक्रिया कोई औपचारिक साधन की आवश्यकता नही पड़ती है। यह एक प्रकार से मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा होती है। इसे भाषा प्रथम के नाम से भी जानते है। भाषा अर्जन ( Language acquisition ) हम आस पास के वातावरण,आस पास के लोगो के माध्यम से भाषा सीखते है। इसमें किताब और व्याकरण की जरूरत नही पड़ती । चॉम्स्की - ‘‘भाषा अर्जन की क्षमता बालकों में जन्मजात होती है और वह भाषा की व्यवस्था को पहचानने की शक्ति के साथ पैदा होता है।’’ वैगोत्सकी - " बालक भाषा का अर्जन परिवेश और समाज के माध्यम से करता है और ये भाषा दो प्रकार की होती है आत्मकेंद्रित और बह्याकेंदृत जो क्रमशः स्वं संवाद और समाज संवाद के लिए प्रयोग की जाती है" भाषा अर्जन की विधियाँ १. अनुकरण: बालक जब भी भाषा के नए नियम या व्याकरण के नियम सुनता है, वह उसे बिना अर्थ जाने दोहराता है। इसके द्वारा वह इन नियमों को आत्मसात कर अपने भाषा प्रयोग में लाने ...